




Tark, Bhavnaen Aur Sachai Ka Jaal
"तर्क, भावनाएं और सच्चाई का जाल" एक गहन आत्मविश्लेषणात्मक यात्रा है जो मानव मन के द्वंद्व—तर्क और भावना—के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास करती है।लेखिका सलोनी गुप्ता ने इस पुस्तक में उन आंतरिक संघर्षों को उजागर किया है जो हमें जीवन के हर मोड़ पर निर्णय लेने में प्रभावित करते हैं।
पुस्तक में यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या हमेशा तर्क ही सही होता है, या भावनाओं की गहराइयों में भी कोई सच्चाई छिपी होती है?जीवन में कई बार जो दिखता है, वही सच नहीं होता; जैसे-जैसे हम गहराई में जाते हैं, भ्रम और सच्चाई की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं।
यह पुस्तक उन क्षणों की पड़ताल करती है जहाँ समाज की नैतिकता और हमारी अंतरात्मा की आवाज़ आपस में टकराती है।तब समझ आता है कि सही-गलत का फैसला केवल परिस्थितियों से नहीं, हमारे भीतर के संतुलन से होता है।
जब जीवन हमें निर्णय लेने की चुनौती देता है, तब आत्मसम्मान, धैर्य और आत्मविश्वास से भरे फैसले ही हमें शांति की ओर ले जाते हैं।यही वह मोड़ होता है जहाँ आत्मविकास शुरू होता है—जब हम भीतर की आवाज़ को सुनना सीखते हैं।
यह पुस्तक एक ऐसी अंतर्यात्रा है, जो न केवल सोचने पर मजबूर करती है, बल्कि भीतर झाँकने का साहस भी देती है।